बीज और वन · Grain & Forest

बीज और वन

आदिवासी अंचल की परंपरागत बीज, प्रकृति के साथ पुनर्जागरण।

हमारा दृष्टिकोण · Our Approach

देशी बीजों का संरक्षण — भविष्य की खाद्य सुरक्षा

झाबुआ के आदिवासी अंचल में सदियों से किसान अपनी परंपरागत फसलों और देशी बीजों पर निर्भर रहे हैं। रालो, गुजरो, बादली, कोदो, कुटकी जैसे अनाज न केवल पोषण का स्रोत हैं, बल्कि इस भूमि की पहचान भी हैं। हरित क्रांति के बाद hybrid बीजों ने इनकी जगह ले ली और किसान धीरे-धीरे बाज़ार पर निर्भर हो गए।

भारत घुमक्कड़ फाउंडेशन देशी बीज संग्रहण, बीज बैंक स्थापना और वन संरक्षण अभियानों के माध्यम से आदिवासी समुदाय को पुनः आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्यरत है। महुआ, तेंदू, चार, करंज जैसे वन उत्पादों के संरक्षण से समुदाय की जीविका और पारिस्थितिकी — दोनों सुरक्षित होती हैं।

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महुआ सुखाना — चात पर सूखते महुआ के फूल
40+
Seed Varieties
देशी बीज प्रकार
1,50,000+
Seeds Planted
बीज रोपे गए
20+
Plantation Sites
वृक्षारोपण स्थल
मुख्य गतिविधियां · Key Activities

हम क्या करते हैं

देशी बीज संरक्षण, वन अभियान और पारंपरिक कृषि के तीन प्रमुख आयाम

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परंपरागत अनाज — देशी बीज संग्रह
रालो, गुजरो, बादली, छीनो, कोदो, कुटकी, बाजरा, ज्वार, देशी सफेद मक्का, देशी तुवर — इन 10 पारंपरिक अनाजों के बीजों का संग्रह, संरक्षण और किसानों के बीच निःशुल्क वितरण।
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वन उत्पाद संरक्षण
महुआ, तुमड़ी, तेंदू, चार, करंज, सीताफल — इन वनस्पतियों के संरक्षण से आदिवासी जीविका और जैव-विविधता दोनों सुरक्षित होती हैं। समुदाय आधारित वन प्रबंधन को प्रोत्साहन।
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बीज बैंक और वृक्षारोपण
20+ स्थलों पर 1,50,000 से अधिक बीज रोपे जा चुके हैं। बीज बैंक के माध्यम से किसान स्थानीय किस्में संजोकर रखते हैं और अगले सीजन में दूसरों को बाँटते हैं।
"बीज, जंगल और परंपरा — इन्हीं से सुरक्षित होगा हमारा भविष्य।"
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