आदिवासी अंचल की परंपरागत बीज, प्रकृति के साथ पुनर्जागरण।
झाबुआ के आदिवासी अंचल में सदियों से किसान अपनी परंपरागत फसलों और देशी बीजों पर निर्भर रहे हैं। रालो, गुजरो, बादली, कोदो, कुटकी जैसे अनाज न केवल पोषण का स्रोत हैं, बल्कि इस भूमि की पहचान भी हैं। हरित क्रांति के बाद hybrid बीजों ने इनकी जगह ले ली और किसान धीरे-धीरे बाज़ार पर निर्भर हो गए।
भारत घुमक्कड़ फाउंडेशन देशी बीज संग्रहण, बीज बैंक स्थापना और वन संरक्षण अभियानों के माध्यम से आदिवासी समुदाय को पुनः आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्यरत है। महुआ, तेंदू, चार, करंज जैसे वन उत्पादों के संरक्षण से समुदाय की जीविका और पारिस्थितिकी — दोनों सुरक्षित होती हैं।
देशी बीज संरक्षण, वन अभियान और पारंपरिक कृषि के तीन प्रमुख आयाम
"बीज, जंगल और परंपरा — इन्हीं से सुरक्षित होगा हमारा भविष्य।"



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