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उत्सव परंपरा

आदिवासी होली — रंग और अग्नि का पर्व

जब पूर्वजों की आत्माओं को रंग से बुलाया जाता है

परंपरा

आदिवासी होली — प्रकृति और पूर्वजों का पर्व

झाबुआ के आदिवासियों की होली मैदानी इलाकों की होली से बिल्कुल अलग है। यहाँ होली केवल रंगों का नहीं, बल्कि पूर्वजों की स्मृति और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का पर्व है।

होलिका दहन के समय आदिवासी युवक अग्नि के बीच से गुजरते हैं — यह साहस और शक्ति का प्रदर्शन है। गाँव की महिलाएं पारंपरिक गीत गाती हैं और बुजुर्ग पूर्वजों को याद करते हैं।

Tribal Holi in Jhabua is a deeply spiritual occasion. Alongside colours, it involves ancestral worship, fire rituals by young men who walk through flames to demonstrate bravery, and communal singing that honours nature's bounty at the end of winter.

आदिवासी होली — अग्नि और रंग

मुख्य विशेषताएं

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अग्नि अनुष्ठान

युवक होलिका की आग के बीच से गुजरकर अपना साहस दिखाते हैं।

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पारंपरिक लोकगीत

महिलाएं होली के पारंपरिक गीत गाती हैं जो पीढ़ियों से चले आ रहे हैं।

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पूर्वज पूजा

होली के अवसर पर पितरों को याद किया जाता है और उनका आशीर्वाद माँगा जाता है।

रंगों से परे का उत्सव

आदिवासी होली यह बताती है कि भारत में एक ही पर्व को कितने रूपों में मनाया जाता है। हर समुदाय ने अपनी आत्मा के अनुसार इसे अपना बनाया है।

भारत घुमक्कड़ इन अनूठी होली परंपराओं को फोटोग्राफी, वीडियो और लेखन के माध्यम से दर्ज करता है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ इन्हें समझ सकें।

आदिवासी होली की विरासत

रंग और आग के इस अनूठे उत्सव को जानें और भारत की विविध होली परंपराओं का हिस्सा बनें।

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