जहाँ जंगल ही देवी है, और पेड़ ही मंदिर
मातावन झाबुआ जिले की एक अनूठी आदिवासी परंपरा है जिसमें ग्राम देवी को जंगल के एक विशेष हिस्से में स्थापित किया जाता है। यह स्थान पवित्र माना जाता है और यहाँ किसी पेड़ को काटना या जीव को मारना वर्जित है।
मातावन केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक सामुदायिक संरक्षण तंत्र है। इस परंपरा के माध्यम से आदिवासी समाज ने सदियों से वनों की रक्षा की है। ग्रामीण अपनी देवी की छाँव में जंगल को जीवित रखते हैं।
Matavan is a sacred grove tradition of the Bhil tribal community of Jhabua. A portion of the forest near the village is dedicated to the village goddess and protected from felling or hunting. This ancient ecological practice has preserved biodiversity for centuries.
मातावन परंपरा यह सिद्ध करती है कि आदिवासी समाज की आस्था और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। जब आधुनिक संरक्षण प्रयास असफल होते हैं, तब भी मातावन की परंपरा अपनी जगह मजबूत खड़ी रहती है।
भारत घुमक्कड़ इस परंपरा का दस्तावेजीकरण कर इसे युवा पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य कर रहा है ताकि यह अनमोल विरासत जीवित रहे।
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